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NCERT Solutions for Class 8th – ध्वनि ~ Dhwani NCERT Solutions

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CBSE Class 8 Hindi Chapter 1 Dhwani NCERT Solutions PDF Download | CBSE Class 8th ध्वनि के प्रश्न उत्तर/NCERT Solutions :- स्वागत है आपका 99KH.net पर आज हम आपको CBSE Class 8 Vasant Hindi Chapter 1 Dhwani NCERT Solutions बताने वाले है। ये क्वेश्चन आपकी आने वाले पेपर्स में काफी मदद कर सकते है, इसलिए इन सभी क्वेश्चन को ध्यान से पढ़े। अगर आपको कोई समस्या आती है तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर पूछे।

Dhwani NCERT Solutions Class 8th ~ Question & Answer

1. कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा?

उत्तर: कवि को ऐसा विश्वास इसलिए है क्योंकि अभी उसके मन में नया जोश व उमंग है। उसे अभी काफ़ी नवीन कार्य करने हैं। वह युवा पीढ़ी को आलस्य की दशा से उबारना चाहते हैं।

2. फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि कौन-कौन-सा प्रयास करता है?

उत्तर: फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि उन्हें कलियों की स्थिति से निकालकर खिले फूल बनाना चाहता है। कवि का मानना है कि उसके जीवन में वसंत आया हुआ है। इसलिए वह कलियों को हाथों के वासंती स्पर्श से खिला देगा। वह फूलों की आँखों से आलस्य हटाकर उन्हें चुस्त व जागरूक करना चाहता है।

3. कवि पुष्पों की तंद्रा और आलस्य दूर हटाने के लिए क्या करना चाहता है?

उत्तर: कवि फूलों को तंद्रा और आलस्य से दूर हटाने के लिए उन पर अपने जोश और उत्साह से भरे हाथ फेरकर जगाते हैं| कवि अपनी ऊर्जा से युवाओं को प्रेरणा देना चाहते हैं और उनमें नये उत्साह का संचार करना चाहते हैं|

4. वसंत को ऋतुराज क्यों कहा जाता है? आपस में चर्चा कीजिए।

उत्तर: हमारे देश में छ: ऋतुएँ होती हैं – ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद् ऋतु, हेमंत ऋतु, शिशिर ऋतु व वसंत ऋतु । इसमें वसंत को ऋतुराज कहते हैं क्योंकि इस ऋतु में न अधिक सर्दी पड़ती है और न अधिक गर्मी। अंग्रेज़ी महीने के अनुसार ये मार्च-अप्रैल में होती है। इसमें वसंत पंचमी, नानक त्योहार आता है, पीली-सरसों खिलती है, पेड़ों पर नए पत्ते नई कोपल आती है, आम के बौर भी लगते हैं। ये सभी के लिए स्वास्थयवर्धक भी होती है इसलिए इसे ऋतुराज कहते हैं।

5. वसंत ऋतु में आनेवाले त्योहारों के विषय में जानकारी एकत्र कीजिए और किसी एक त्योहार पर निबंध लिखिए।

उत्तर: वसंत ऋतु में कई त्यौहार मनाए जाते है, जैसे-

  • वसंत-पंचमी
  • महा शिवरात्रि
  • होली 

आदि।

होली :

होली त्योहार यानी रंगों का त्योहार। यह भारत के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। प्रतिवर्ष मार्च के महीने में आमतौर पर हिंदू धर्म के लोगों द्वारा उत्साह के साथ होली मनाई जाती है। जो भी लोग इस बेहतरीन पर्व को उत्साह से मनाते हैं, वे हर साल रंगों के साथ खेलने तथा स्वादिष्ट व्यंजनों का इंतजार करते हैं।

होली त्योहार के मनाये जाने के पीछे की कहानी यह ​​है कि कई वर्षों पहले हिन्दू धर्म में हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा था। वह अपने आप को भगवान मानता था परंतु था वह एक राक्षस था। उसका एक पुत्र था जिसका नाम प्रह्लाद था और एक बहन थी जिसका नाम था होलिका। ऐसा माना जाता है कि हिरण्यकश्यप के पास भगवान श्री ब्रह्मा जी का वरदान था। इस वरदान में कोई भी आदमी, जानवर या हथियार उसे मार नहीं सकता था। यह वरदान उसके लिए अभिशाप बन गया और उसने अपने पुत्र को नहीं बख्शा क्योंकि वह बहुत घमंडी हो गया था। उसने अपने राज्यके लोगों को भगवान की आराधना करने के बजाय उसकी पूजा करने का आदेश दिया।

इसके बाद, सभी लोग हिरण्यकश्यप की पूजा करने लगे, लेकिन प्रह्लाद ने अपने पिता की पूजा करने से इनकार कर दिया क्योंकि प्रह्लाद भगवान विष्णु सच्चे भक्त थे। शैतान राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र की अवज्ञा को देखकर ने अपनी बहन के साथ प्रह्लाद को मारने की योजना बनाई। उसने होलिका की गोद में अपने बेटे प्रह्लाद को आग में बैठाया, जहां होलिका जल गई और भगवान विष्णु के आशीवार्द से प्रह्लाद सुरक्षित निकल आए। तब से लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होली मनाना शुरू कर दिया।

होली दोस्तों और घर-परिवार के साथ खुशियाँ बांटने के बारे में है। लोग अपनी परेशानियों को भूलकर इस अदभुत त्योहार को मनाने के लिए एकत्रित होते हैं। दूसरे शब्दों में, हम अपनी दुश्मनी भूल जाते हैं और त्योहार की भावना में पड़ जाते हैं। होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है क्योंकि इसमे सभी लोग गुलाल तथा तरह-तरह के रंगों के साथ खेलते हैं।

लोग उत्तर भारत में विशेष रूप से उत्साह और हर्ष के साथ होली मनाते हैं। होली के एक दिन पहले, लोग ‘होलिका दहन’ नामक एक अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में, लोग सार्वजनिक क्षेत्रों में लकड़ी के ढेर को जला देते हैं। यह होलिका और राजा हिरण्यकश्यप की कहानी बुरी शक्तियों को जलाने का प्रतीक है। इसके अलावा, वे होलिका के चारों ओर आशीर्वाद लेने और भगवान के प्रति अपनी भक्ति के लिए इकट्ठा होते हैं। होलिका दहन के बाद अगले दिन भारत का सबसे रंगीन दिन होता है, क्यंकि इस दिन लोग रंगों से खेलते है। लोग सुबह उठकर भगवान को पूजा में रंग अर्पित करते हैं इसके बाद वे रंगों से होली खेलते हैं। बच्चे पिचकारियों में पानी भरकर होली खेलते हैं। इस दिन बड़े लोग भी बच्चे बनकर एक दूसरे के चेहरे पर रंग लगाते हैं। होली प्रेम और भाईचारे का प्रतिक है। यह देश में सद्भाव और खुशी लाती है। होली बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह रंगीन त्योहार लोगों को एकजुट करता है और जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मकता को दूर करता है।

भाषा की बात

6. ‘हरे-हरे’, ‘पुष्प-पुष्प’ में एक शब्द की एक ही अर्थ में पुनरावृत्ति हुई है। कविता के ‘हरे-हरे ये पात’ वाक्यांश में ‘हरे-हरे’ शब्द युग्म पत्तों के लिए विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। यहाँ ‘पात’ शब्द बहुवचन में प्रयुक्त है। ऐसा प्रयोग भी होता है जब कर्ता या विशेष्य एक वचन में हो और कर्म, या क्रिया या विशेषण बहुवचन में; जैसे – वह लंबी-चौड़ी बातें करने लगा। कविता में एक ही शब्द का एक से अधिक अर्थों में भी प्रयोग होता है – ”तीन बेर खाती ते वे तीन बेर खाती है।” जो तीन बार खाती थी वह तीन बेर खाने लगी है। एक शब्द ‘बेर’ का दो अर्थों में प्रयोग करने से वाक्य में चमत्कार आ गया। इसे यमक अलंकार कहा जाता है। कभी-कभी उच्चारण की समानता से शब्दों की पुनरावृत्ति का आभास होता है जबकि दोनों दो प्रकार के शब्द होते हैं; जैसे – मन का/मनका। ऐसे वाक्यों को एकत्र कीजिए जिनमें एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो। ऐसे प्रयोगों को ध्यान से देखिए और निम्नलिखित पुनरावृत शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए – बातों-बातों में, रह-रहकर, लाल-लाल, सुबह-सुबह, रातों- रात, घड़ी-घड़ी।

उत्तर:

बातों-बातों में – बातों-बातों में हम रास्ता भटक गए।

रह-रहकर – आज तो रह-रहकर गर्मी पड़ रही हैं।

लाल-लाल – लगातार टी•वी देखने के बाद मेरी आँखें लाल-लाल हो गयीं।

सुबह-सुबह – सुबह-सुबह पड़ने से याद जल्दी होता हैं।

रातों-रात – वह रातों-रात गायब हो गया।

घड़ी-घड़ी – घड़ी-घड़ी शिक्षक उसे पढ़ाई करने के लिए टोकते रहते थे।


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