NCERT Solutions for Class 9th – साँवले सपनों की याद ~ Savle Sapno Ki Yaadein NCERT Solutions

CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter 4 Savle Sapno Ki Yaadein NCERT Solutions PDF Download | CBSE Class 9 साँवले सपनों की याद पाठ के प्रश्न उत्तर/NCERT Solutions :- स्वागत है आपका 99KH.net पर आज हम आपको CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter Savle Sapno Ki Yaadein NCERT Solutions बताने वाले है। ये क्वेश्चन आपकी आने वाले पेपर्स में काफी मदद कर सकते है, इसलिए इन सभी क्वेश्चन को ध्यान से पढ़े। अगर आपको कोई समस्या आती है तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर पूछे।

BoardCBSE
TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectHindi Kshitiz
ChapterChapter 4
Chapter Nameसाँवले सपनों की याद
Number of Questions Solved8
CategoryNCERT Solutions
Savle Sapno Ki Yaadein NCERT Solutions

Savle Sapno Ki Yaadein NCERT Solutions Class 9th ~ Question & Answer

1.किस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को बदल दिया?

उत्तर: बचपन के दिनों में एक दिन अचानक उनकी एयरगन से एक गौरैया घायल हो गई, उस दिन सालिम अली को उनका पक्षियों के प्रति प्रेम का आभास हुआ। अतः उस दिन से उनके जीवन की दिशा बदल गई तथा वह एक प्रसिद्ध बर्ड वाचर बने।

2.सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री के सामने पर्यावरण से संबंधित किन संभावित खतरों का चित्र खींचा होगा कि जिससे उनकी आँखें नम हो गई थीं?

उत्तर: सालिम अली ने तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पास केरल की “साइलेंट वैली” में चलने वाली रेगिस्तानी हवा के कारण पक्षियों को होने वाली समस्या का खाका खींचा | उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण को प्रदूषण के दुष्प्रभाव से बचाने, पक्षियों की रक्षा, वनों की अंधाधुंध कटाई आदि से संबंधित बातें उठाई होंगी। चौधरी चरणसिंह किसान परिवार से थे इसलिए उन्हें धरती से लगाव था | सालिम अली के मुख से ऐसी निःस्वार्थ बातें तथा पर्यावरण के प्रति उनकी चिंता जानकर चौधरी साहब की आँखें भर आईं होंगी।

3. लाॅरेंस की पत्नी फ्रिडा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि “मेरी छत पर बैठने वाली गोरैया लॉरेंस के बारे में ढेर सारी बातें जानती है” ?

उत्तर: लॉरेंस की पत्नी फ्रीडा जानती थी कि लॉरेंस को गौरैया से बहुत प्रेम था। वे अपना काफी समय गौरैया के साथ बिताते थे। गौरैया भी उनके साथ अंतरंग साथी जैसा व्यवहार करती थी। उनके इसी पक्षी-प्रेम को उद्घाटित करने के लिए उन्होंने यह वाक्य कहा।

4.आशय स्पष्ट कीजिए-

(क) वो लॉरेंस की तरह, नैसर्गिक जि़ंदगी का प्रतिरूप बन गए थे।

उत्तर: लॉरेंस का जीवन बहुत सीधा-सादा था, प्रकृति के प्रति उनके मन में जिज्ञासा थी। सालिम अली का व्यक्तित्व भी लॉरेंस की तरह ही सुलझा तथा सरल था।

(ख) कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटाना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा!

उत्तर: लेखक यहाँ सालिम अली की मृत्यू का दुख प्रकट करते हुए बताते हैं कि अब भले ही कोई अपने हृद्य की धड़कन या शरीर का जोश़ देना भी चाहे तब भी पक्षी रूपी सालिम लोटकर नहीं आ पाऐंगे।

(ग) सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे।

उत्तर: इस पंक्ति में सालिम अली के प्रकृति व पक्षी-प्रेम को महत्ता दी गई है और कहा गया है कि उन्होंने पक्षियों की इतनी सेवा की उन्हें इतनी बारीकी से जाना कि उन्होंने प्रकृति की दुनिया में अपनी विशाल मिसाल कायम की। वे मात्र टापू न बनकर अथाह सागर बनकर उभरे हैं।

5.इस पाठ के आधार पर लेखक की भाषा-शैली की चार विशेषताएँ बताइये।

उत्तर: साँवले सपनों की याद’ पाठ के आधार लेखक जाबिर हुसैन की भाषाशैली में निम्नलिखित विशेषताएँ दिखती हैं-

  1. बिंबात्मकता – लेखक द्वारा इस पाठ में जगह-जगह पर इस तरह शब्द चित्र प्रस्तुत किया है कि उसका दृश्य हमारी आँखों के सामने साकार हो उठता है; जैसे-
    • इस हुजूम में आगे-आगे चल रहे हैं, सालिम अली।
    • भीड़-भाड़ की जिंदगी और तनाव के माहौल से सालिम अली का यह आखिरी पलायन है।
    • मुझे नहीं लगता, कोई इस सोए पक्षी को जगाना चाहेगा।
  2. शब्दावली की विविधता – लेखक ने इस पाठ में मिली-जुली शब्दावली अर्थात् तत्सम्, तद्भव, देशज और विदेशी शब्दों का भरपूर प्रयोग किया है; जैसे-
    • यह सफ़र पिछले तमाम सफ़रों से भिन्न है।
    • जंगलों और पहाड़ों, झरनों और आबशारों को वे प्रकृति की नज़र से नहीं, आदमी की नज़र से देखने को उत्सुक रहते हैं।
    • कब माखन के भाँड़े फोड़े थे और दूध-छाली से अपने मुँह भरे थे।
    • इन जैसा बर्ड-वाचर’ शायद ही कोई हुआ हो।
    • जब वाटिका का माली सैलानियों को हिदायत देगा।
  3. मुहावरेदार भाषा – लेखक ने जगह-जगह मुहावरों का प्रयोग कर भाषा को सरस, रोचक एवं सजीव बना दिया है जैसे-
    • अब हिमालय और लद्दाख की बरफ़ीली जमीनों पर जीने वाले पक्षियों की वकालत कौन करेगा?
    • पर्यावरण के संभावित खतरों का जो चित्र सालिम अली ने उनके सामने रखा, उसने उनकी आँखें नम कर दी थीं।
    • यह दुनिया उन्होंने बड़ी मेहनत से अपने लिए गढ़ी थी।
  4. संवाद-शैली का प्रयोग – लेखक ने अपने इस संस्मरण में संवाद शैली द्वारा ऐसा प्रभाव उत्पन्न कर दिया है मानो दो व्यक्ति बातें कर रहे हों; जैसे-
    • मुझे नहीं लगता, कोई इस सोए हुए पक्षी को जगाना चाहेगा।
    • मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया लॉरेंस के बारे में ढेर सारी बातें जानती है।

6. इस पाठ में लेखक ने सालिम अली के व्यक्तित्व का जो चित्र खींचा है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: सालिम अली एक प्रसिद्द पक्षी-विज्ञानी थे। पक्षियों के साथ-साथ वे प्रकृति प्रेमी भी थे। वे पक्षियों के बारे में नवीन जानकारी एकत्रित करते रहते थे। इसके साथ ही वे पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी चिंतित रहते थे | वे अपने कंधों पर सैलानियों-सा बोझ लटकाए, गले में दूरबीन टाँगें पक्षियों की खोज में दूर-दराज के क्षेत्रों में निकल जाया करते थे। पक्षियों की खोज में दुर्गम स्थानों पर घंटों बैठना उनकी आदत थी। पर्यावरण के प्रति चिंतित होने के कारण वे तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से भी मुलाकात कर चुके थे। वे प्रकृति की दुनिया में अथाह सागर बनकर उभरे थे।

7.” साँवले सपनों की याद” शीर्षक की सार्थकता पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर:

‘साँवले सपनों की याद’ एक रहस्यात्मक शीर्षक है। इसे पढ़कर पाठक जिज्ञासा से आतुर हो जाता है कि कैसे सपने? किसके सपने? कौन-से सपने? ये सपने साँवले क्यों हैं? कौन इन सपनों की याद में आतुर है? आदि।

‘साँवले सपने’ मनमोहक इच्छाओं के प्रतीक हैं। ये सपने प्रसिद्ध पक्षी-प्रेमी सालिम अली से संबंधित हैं। सालिम अली जीवन-भर सुनहरे पक्षियों की दुनिया में खोए रहे। वे उनकी सुरक्षा और खोज के सपनों में खोए रहे। ये सपने हर किसी को नहीं आते। हर कोई पक्षी-प्रेम में इतना नहीं डूब सकता। इसलिए आज जब सालिम अली नहीं रहे तो लेखक को उन साँवले सपनों की याद आती है जो सालिम अली की आँखों में बसते थे। यह शीर्षक सार्थक तो है किंतु गहरा रहस्यात्मक है। चंदन की तरह घिस-घिसकर इसके अर्थ तथा प्रभाव तक पहुँचा जा सकता है।

रचना और अभिव्यक्ति:

8. प्रस्तुत पाठ सालिम अली की पर्यावरण के प्रति चिंता को भी व्यक्त करता है। पर्यावरण को बचाने के लिए आप कैसे योगदान दे सकते हैं?

उत्तर.8. पर्यावरण को बचाने के कुछ तरीके हैं-

  • क) खुल्ले में शौच न करना।
  • ख) सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करना।
  • ग) नदियों के पानी को प्रदूषित न करना।
  • घ) वन व पेड़ों को न काटना तथा अधिक से अधिक पौधारोपण करना।

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