NCERT Solutions for Class 9th – प्रेमचंद के फटे जूते ~ Premchand ke phate joote NCERT Solutions

CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter 6 premchand ke phate joote NCERT Solutions PDF Download | CBSE Class 9 प्रेमचंद के फटे जूते पाठ के प्रश्न उत्तर/NCERT Solutions :- स्वागत है आपका 99KH.net पर आज हम आपको CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter premchand ke phate joote NCERT Solutions बताने वाले है। ये क्वेश्चन आपकी आने वाले पेपर्स में काफी मदद कर सकते है, इसलिए इन सभी क्वेश्चन को ध्यान से पढ़े। अगर आपको कोई समस्या आती है तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर पूछे।

premchand ke phate joote NCERT Solutions

Premchand ke phate joote NCERT Solutions Class 9th ~ Question & Answer

1. हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्द चित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं ?
उत्तर:- 

  • प्रेमचंद के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएं:
  • प्रेमचंद सादगी युक्त जीवन जीते थे। वे प्रदर्शनवाद से दूर रहते थे।
  • प्रेमचंद एक उच्च विचार वाले व्यक्ति थे।
  • प्रेमचंद एक सर्वोत्तम साहित्यकार के साथ एक स्वाभिमानी व्यक्ति भी थे।
  • वे हर मुश्किल परिस्थिति का बेधड़क सामना करते थे।
  • उनका व्यक्तित्व संघर्षशील था।  

2. सही कथन के सामने (✔) का निशान लगाइए –
क) बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अँगुली बाहर निकल आई है।
ख) लोग तो इत्र चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए।
ग) तुम्हारी यह व्यंग्य मुसकान मेरे हौसले बढ़ाती है।
घ) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ अँगूठे से इशारा करते हो ?
उत्तर:- 
ख) लोग तो इत्र चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए। (✔)


3. जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं।
उत्तर:- 
हाँ जूतों का आशय अमीरी से है और टोपी प्रतिष्ठा, मर्यादा और गौरव का प्रतीक है। इज़्ज़त का महत्व धन, संपत्ति से ऊँचा होता है। परन्तु आज समाज में संपत्ति को इज़्ज़त से ऊपर रखा जाता है और इसी कारण समृद्ध लोगों को हमेशा से ही धनवानों के आगे झुकना पड़ा है। 

4. तुम परदे का महत्व नहीं जानते, हम पर्दे पर कुर्बान हो रहे हैं।
उत्तर:- 
प्रेमचंद ने कभी पर्दे को अर्थात् लुकाव-छिपाव को महत्त्व नहीं दिया। उन्होंने वास्तविकता को कभी टॅकने का प्रयत्न नहीं किया। वे इसी में संतुष्ट थे कि उनके पास छिपाने-योग्य कुछ नहीं था। वे अंदर-बाहर से एक थे। यहाँ तक कि उनका पहनावा भी अलग-अलग न था। लेखक अपनी तथा अपने युग की मनोभावना पर व्यंग्य करता है कि हम पर्दा रखने को बड़ा गुण मानते हैं। जो व्यक्ति अपने कष्टों को छिपाकर समाज के सामने सुखी होने का ढोंग करता है, हम उसी को महान मानते हैं। जो अपने दोषों को छिपाकर स्वयं को महान सिद्ध करता है, हम उसी को श्रेष्ठ मानते हैं।

5. जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अँगुली से इशारा करते हो ?
उत्तर:- 
व्यंग्य-सामाजिक बुराई की तरफ है कि व्यक्ति जिन चीजों को बुरा समझता है उनकी तरफ हाथ की बजाय पाँव की अंगुली से इशारा करता है, अर्थात् पाँव की अंगुली दिखाना अपमान करने के समान है।


6. पाठ में एक जगह लेखक सोचता है कि ‘फोटो खिंचाने कि अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी ?’ लेकिन अगले ही पल वह विचार बदलता है कि’नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी,।’ आपके अनुसार इस संदर्भ में प्रेमचंद के बारे में लेखक के विचार बदलने की क्या वजहें हो सकती हैं?
उत्तर:- 
मेरे विचार से प्रेमचंद के बारे में लेखक का विचार यह रहा होगा कि समाज की परंपरा-सी है कि वह अच्छे अवसरों पर पहनने के लिए अपने वे कपड़े अलग रखता है, जिन्हें वह अच्छा समझता है। प्रेमचंद के कपड़े ऐसे न थे जो फ़ोटो खिंचाने लायक होते। ऐसे में घर पहनने वाले कपड़े और भी खराब होते। लेखक को तुरंत ही ध्यान आता है कि प्रेमचंद सादगी पसंद और आडंबर तथा दिखावे से दूर रहने वाले व्यक्ति हैं। उनका रहन-सहन दूसरों से अलग है, इसलिए उसने टिप्पणी बदल दी।


7. आपने यह व्यंग्य पढ़ा। इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन-सी बात आकर्षित करती है ?
उत्तर:- 
मुझे इस व्यंग्य की सबसे आकर्षक बात लगती है -विस्तारण शैली। लेखक ने व्यंग्यात्मक शैली में महान साहित्यकार प्रेमचंद की विशेषताओं का चित्र प्रस्तुत किया है। इस पाठ में लेखक ने प्रेमचंद के साथ-साथ स्वयं की दिखावे की प्रवृति पर भी व्यंग्य करते हुए सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रहार किया है।यहाॅं लेखक की ईमानदार छवि को भी बल मिलता है।


8. पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग किन संदर्भो को इंगित करने के लिए किया गया होगा ?
उत्तर:- 
पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग मार्ग की बाधा के रुप में किया गया है। प्रेमचंद ने अपनी लेखनी के द्वारा समाज की बुराईयों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया। ऐसा करने के लिए उन्हें बहुत सारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।


• रचना-अभिव्यक्ति
7. प्रेमचंद के फटे जूते को आधार बनाकर परसाई जी ने यह व्यंग्य लिखा है। आप भी किसी व्यक्ति की पोशाक को आधार बनाकर एक व्यंग्य लिखिए।
उत्तर:- 
हमारे एक दूर के रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं। अक्सर नए कपडे, संपत्ति और चकाचौंध वाली वस्तुओं को लेकर दिखावा करते हैं। वे हमारे घर राजस्थान के एक गांव आए। अब हम ठहरे सादा जीवन जीने वाले लोग। उन्होंने हमारे कपड़ों को लेकर एवं हमारे गांव में मिलते पोशाकों को लेकर मज़ाक उड़ाया परन्तु अगले ही दिन उनके बच्चों को हमारे गांव के बाजार में एक पोशाक  पसंद आ गई और लेने की ज़िद करने लगे। और उनके माता – पिता को वह खरीदनी पड़ी। एक ओर उन्होंने मज़ाक बनाया और अब उसी पोशाक को खरीदा। 


8. आपकी दृष्टि में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है ?
उत्तर:- 
आज के समय में लोगों का दृष्टिकोण बहुत बदल गया है। यहाँ तक की व्यक्ति का मान-सम्मान और चरित्र भी वेश-भूषा पर अवलम्बित हो गया हैं। आज की दुनिया दिखावे की दुनिया बन गई है। अगर समाज में अपनी शान बनाए रखनी है तो महँगे से महँगे कपड़े पहनना आवश्यक हो गया है। आज सादा जीवन जीने वालों को पिछड़ा समझा जाने लगा है।


9. पाठ में आए मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:-

मुहावरेअर्थवाक्य में प्रयोग
अटक जानास्थिर हो जाना उसके सुंदर कंगन पर मेरी दृष्टि अटक गई है।
न्योछावर होनाकुर्बान होनामंगल पांडे फ़िल्म देखने के बाद सर्वस्व न्योछावर करने का मन करता है।
पछतावा होनापश्चाताप होनाअपने भाई के साथ झगड़ा करने के बाद आपको पछतावा तो होना ही चाहिए।
रो पड़ना   पीड़ा महसूस करनाअपने पुत्र को भयंकर चोट लगी देख माँ का मन रो पड़ा।
लहुलुहान होनाघायल होनाकार दुर्घटना में ड्राइवर लहुलुहान हो गया।

10. प्रेमचंद के व्यक्तित्व को उभारने के लिए लेखक ने जिन विशेषणों का उपयोग किया है उनकी सूची बनाइए।
उत्तर:- 
प्रेमचंद के व्यक्तित्व को उभारने के लिए लेखक ने निम्नलिखित विशेषणों का उपयोग किया है:

  • – महान कलाकार 
  • – उपन्यास सम्राट
  • – जनता के लेखक
  • – साहित्यिक पुरखे
  • – युग – प्रवर्तक।

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