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Important Questions Class 9th- माटी वाली ~ Mati wali Extra Questions

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CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter Mati wali Important Questions/Extra Questions | CBSE Class 9 माटी वाली Important Questions :-स्वागत है आपका 99KH.net पर आज हम आपको CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter Mati wali Extra Questions Important Questions बताने वाले है। ये क्वेश्चन आपकी आने वाले पेपर्स में काफी मदद कर सकते है, इसलिए इन सभी क्वेश्चन को ध्यान से पढ़े।

Mati wali

Important Questions Class 9th Mati Wali ~ Question & Answer

प्रश्न :- ‘शहरवासी सिर्फ माटी वाली को ही नहीं उसके कंटर को भी अच्छी तरह पहचानते हैं।’ आपकी समझ में वे कौन से कारण रहे होंगे, जिनके रहते माटी वाली को सब पहचानते थे?

अथवा

टिहरी शहरवासियों के लिए माटी वाली का क्या महत्व है? वे माटी वाली को किस तरह पहचानते थे, संक्षेप में लिखें।
उत्तर-
माटी वाली की लाल मिट्टी से सभी टिहरी वासियों का चूल्र्हा चौका पोता जाता था। पूरे शहर में वह अकेली महिला थी, जो हर घर मैं लाल मिट्टी पहुँचाती थी। उसके पास बिना ढ़क्कन का कनस्तर था। यही कारण था कि उस माटी वाली को सभी पहचानते थे।

प्रश्न :- ठकुराइन ने बुढ़िया को भाग्यवान क्यों कहा था?

उत्तर- जब ठकुराइन के घर ‘माटी वाली’ मिट्टी का कनस्तर लेकर पहुंची तब चाय का समय हो चुका था। भारतीय संस्कृति में मेहमान को भगवान् का ही रूप मानते हैं इसलिए उसने कहा था, “तू बहुत भाग्यवान है। चाय के टैम पर आई है हमारे घर। भाग्यवान आए खाते वक्त।”

प्रश्न :- टिहरी की महिलाएँ माटी वाली से अपनी सहानुभूति तथा दया किस प्रकार प्रकट करती थीं?

उत्तर- माटी वाली अत्यंत गरीब महिला थी, जिसकी आजीविका का साधन माटाखान से लाई मिट्टी घरों तक पहुँचाना था। घर पर उसका बीमार पति अकेला रहता था। माटी वाली अपना काम अत्यंत तन्मयता से करती थी। वह सभी के घर बिना भेदभाव के लाल मिट्टी दिया करती थी। माटी वाली की स्थिति का अनुमान कर महिलाएँ कुछ पैसों के साथ ही उसे चाय या शाम की बासी एक-दो रोटियाँ भी दे दिया करती थीं। कभी-कभी कोई महिला रोटी के साथ कुछ साग आदि देकर अपनी सहानुभूति तथा दया प्रकट कर दिया करती थी।

प्रश्न :- माटी वाली के पास अपने अच्छे या बुरे भाग्य के बारे में ज़्यादा सोचने का समय क्यों नहीं था?
उत्तर- माटी वाली के पास अपने अच्छे या बुरे भाग्य के बारे में ज़्यादा सोचने का समय नहीं था। क्योंकि वह सुबह से शाम तक काम में भिड़ी रहती धी। काम नहीं होता तो पेट की चिन्ता और बढ़ जाती। वह अपने से ज़्यादा अपने बुड्ढ़े के बारे में सोचती थी।

प्रश्न :- शहर वालों को लाल मिट्टी की ज़रूरत क्यों होती थी?

उत्तर- दो नदियों के बीच बसे टिहरी शहर की ज़मीन रेतीली थी। वे लोग खाना पकाने के लिए चूल्हा जलाते थे और हर बार उन्हें चूल्हों की लाल मिट्टी से पुताई करनी पड़ती थी क्योंकि रेतीली मिट्टी से पुताई नहीं हो सकती। साथ ही वे कमरों, दीवारों की गोबरी-लिपाई करने के लिए भी लाल मिट्टी का प्रयोग करते थे।

प्रश्न :- भूख मीठी कि भोजन मीठा से क्या अभिप्राय है? माटी वाली पाठ के सन्दर्भ में लिखिए।

उत्तर- भूख और भोजन का आपस में बहुत ही गहरा रिश्ता है। यदि खाने वाले को भूख लगी हो तो भोजन रुचिकर तथा स्वादिष्ट लगती है और खाने वाला का पेट पहले से भरा हो तो वही भोजन उसे अच्छा नहीं लगेगा। उसे भोजन में कोई स्वाद नहीं मिलेगा। भोजन की ओर देखने का उसका जी भी न करेगा। अतः स्वाद भोजन में नहीं बल्कि भूख में हैं।

प्रश्न :- माटी वाली ने मालकिन द्वारा दी गई दो रोटियों का क्या किया?

उत्तर- माटी वाली जिस घर में मिट्टी डालने गई थी, उस घर की मालकिन ने उसे रोटी खाने के लिए दी। मालकिन के घर अंदर जाते ही उसने अपने सिर पर रखने वाला कपड़ा निकाला, उसमें से एक रोटी मोड़ कर अपने पति के लिए उस कपड़े में रख ली । मालकिन ने आने पर वह ऐसे मुँह चलाने लगी जैसे उसने एक रोटी समाप्त कर ली है। दूसरी रोटी उसने चाय के साथ खाई।

प्रश्न :- माटी वाली के बुड्ढे को अब रोटियों की आवश्यकता क्यों नहीं रह गई थी?

उत्तर- माटी वाली घर की मालकिन से मिली तीन रोटियाँ लेकर जा रही थी। वह मन-ही-मन आज बहुत खुश थी। घर पहुँचने पर कदमों की आहट सुनकर भी जब बुड्ढे के शरीर में हलचल न हुई तो बुढ़िया का माथा ठनका, उसने देखा कि बुड्ढा मर चुका था। उसे अब और रोटियों की जरूरत न थी।

प्रश्न :- माटी लाने के आदेश के साथ माटी वाली को क्या मिला? उसे पाकर वह क्या सोचने लगी?
उत्तर- माटी वाली को माटी लाने के आदेश के साथ दो रोटियाँ मिलीं। उसने रोटियों को अपने बुड्ढ़े के लिए कपड़े में बाँध लिया। वह रास्ते भर सोचती जा रही थी कि रोटियाँ पाकर बुड्ढे का चेहरा खिल जाएगा।

प्रश्न :- घर की मालकिन ने यह क्यों कहा कि अपनी चीज़ का मोह बहुत बुरा होता है?

उत्तर- घर की मालकिन दूर की बात सोचने वाली थी। उसके घर में पीतल के बरतन थे। वह सोचती थी कि उसके पूर्वजों ने यह बरतन पता नहीं किस प्रकार पेट-काट-काट कर इकट्ठे किए होंगे। उसे इन बरतनों से बहुत लगाव था। वह उसके पुरखों की गाढ़ी कमाई के थे। अब टिहरी पर बांध बन रहा था जिस कारण उसे मकान छोड़ना पड़ेगा। वह इस उम्र में दूसरी नई जगह जाने को तैयार नहीं हैं इसलिए वह माटी वाली से कहती है कि अपनी चीज़ का मोह बहुत बुरा होता है।

प्रश्न :- टिहरी प्रोजेक्ट से ग्रामवासियों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा, संक्षेप में लिखिए?
उत्तर- टिहरी बाँध की दो सुरंगों को जैसे ही बन्द किया गया वैसे ही शहर में आपाथापी मच गई, क्योंकि शहर में तेजी से पानी भरने लगा था। लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर भाग रहे थे। पानी भरने के कारण श्मशान घाट भी डूब गया था। माटी वाली अपने झोपड़े के सामने बैठी थी। उसका बुड्ढ़ा परलोक सिधार गया था। वह हर आनेजाने वाले से यही कह रही थी कि- “गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए।”

प्रश्न :- माटी वाली चाय समाप्त कर कहाँ गई और उसे वहाँ  से क्या मिला?

उत्तर- माटी वाली चाय समाप्त कर अपना समान लेकर सामने वाले घर में चली गई । उस घर से उसे कल मिट्टी लेकर आने का काम मिला था। उस घर की मालकिन भी उसे दो रोटी खाने दे देती है।

प्रश्न :- टिहरी की ठकुराइन जो माटी वाली की ग्राहक थी, ने अपने पूर्वजों की विरासत को किस प्रकार सहेजकर रखा था? सप्रमाण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- माटी वाली की ग्राहक टिहरी की ठकुराइन को पूर्वजों की विरासत से विशेष लगाव था। वे उनकी विरासत की प्रत्येक वस्तु को बहुत सँभालकर रखती थी। आम मनुष्य पूर्वजों की वस्तुओं को कबाड़ या पुराने फैशन की कहकर उन्हें कबाड़ी के हाथों औने-पौने दामों में बेच देता है, पर इसके विपरीत ठकुराइन ने पूर्वजों की विरासत भले ही वह पीतल का साधारण गिलास ही क्यों न हो सँभाल रखा है। वे उसे पुरखों की गाढ़ी कमाई से अर्जित किया हुआ मानती है, जिसमें पुरखों की मेहनत और यादें समाई हैं।

प्रश्न :- माटी वाली पाठ में किस समस्या को प्रमुखता से उभरा गया है? पाठ में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए

उत्तर- ‘माटी वाली’ में विस्थापितों की उस समस्या को रेखांकित किया गया है जो टिहरी बाँध बनने से उत्पन्न हुई थी। इसका सबसे ज़्यादा प्रभाव गरीबों लाचार तथा असहाय लोगों पर पड़ा है। लोग विस्थापन की पीड़ा को समझें, उनके प्रति सहानुभूति पूर्वक विचार करें। माटी वाली जिस वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है, उसका अन्तिम सहारा श्मशान तक छिन चुका है।
माटी वाली सर्वहारा है। उसके पास न ज़मीन है न कागज़ात, विस्थापान के बाद वह कहाँ जाएगी, उसका क्या होगा? ऐसे ही प्रश्नों का जवाब खोजने की आवश्यकता है। प्रगति की कीमत इसी वर्ग को चुकानी पड़ती है। समाज एवं सरकार को इसी वर्ग के बारे में चिंतन करने की आवाश्यकता है।

प्रश्न :- माटी वाली की दिनचर्चा कैसी थी?

उत्तर – माटी वाली की दिनचर्चा बहुत व्यस्तमय थी। पति के अस्वस्थ होने के कारण सभी काम वह स्वयं करती थी। उसका गाँव शहर से दूर था। वह रोज़ सुबह घर से मिट्टी के लिए निकल जाती है। पहले वह माटा खान में मिट्टी खोदती है फिर उन्हें विभिन्न स्थानों पर फैले घरों तक पहुँचाती है। वह यह सारा काम अकेले करती है। उसे अपना काम समाप्त करते-करते रात घिरने लगती है। वह जल्दी-जल्दी पैर उठा कर घर के लिए चलती है। घर पहुँचकर वह रसोई का काम निपटाती है और घर के अन्य काम पूरे करती है।

प्रश्न :- माटी वाली के चरित्र की कौन-सी विशेषताएँ आपको प्रभावित करती हैं, लिखिए?

उत्तर- माटी वाली गरीब, लाचार महिला है जो अपनी रोजी-रोटी के लिए सुबह से शाम तक परेशान रहती है। वह प्रातःकाल माटाखान जाती है और माटी लाकर घर-घर में देती है। वह अत्यंत परिश्रमी महिला है। माटी वाली बुढ़िया का पति बीमार एवं असक्त था। वह बिस्तर पर लेटा रहता था। माटी वाली शहर से आते ही सबसे पहले अपने पति के भोजन की व्यवस्था कर उसकी सेवा में जुट जाती थी। उसकी पतिपरायणता अनुकरणीय थी। माटी वाली का स्वभाव अत्यंत विनम्र था। वह सभी की प्रिय थी। सभी उसके कार्य-व्यवहार से खुश रहते थे। इस प्रकार माटी वाली की परिश्रमशीलता, मृदुभाषिता, पति-परायणता तथा व्यवहारकुशलता मुझे प्रभावित करती है।

प्रश्न :- काँसे के बर्तनों के गायब होने के पीछे लेखक ने समाज की किस प्रवृति पर व्यंग्य किया है।
उत्तर- माटी वाली घरों में माटी देकर कुछ देर ठहरती थी। परस्पर दुख-सुख की बातें होती थीं। घर की मालकिने उसके दर्द को समझतीं, शाम की बची रोटियाँ उसे दे देतीं। कर्भी कभी रोटी के साथ चाय भी मिल जाती थी। एक घर में उसे पीतल के गिलास में चाय मिली तो उसने कहा कि- अब तो घरों में पीतल की गिलास नहीं मिलती। यह सुनकर घर की मालकिन ने कहां- “अब तो घरों से काँसे के बरतन भी गायब हो रहे हैं। लोग काँसे और पीतल की वस्तुओं को रद्दी के भाव बेचते हैं। जब की यह उनके पुरखों के गाढ़ी कमाई से तन-पेट काटकर बनाई हुई होतीं हैं। लोग इन विरासतों का मूल्य नहीं समझते हैं। वे आधुनिकता तथा फैशन के नाम पर नई वस्तुएँ अपनाते जा रहे हैं।” लेखक ने लोगों की इसी प्रवृति पर व्यंग्य किया है।

प्रश्न :- टिहरी बाँध पुनर्वास वाले साहब किन लोगों को मुआवजा दे रहे थे?

उत्तर- टिहरी बाँध बनने से नीचे के शहरों में पानी भर गया था। इसलिए वहाँ  के लोगों को दूसरी जगह विस्थापित किया गया। टिहरी बाँध वाले साहब उन लोगों का मुआवजा दे रहे थे जिनके पास ज़मीन, घर और दुकान संबंधी कागज़ थे। जिन लोगों के पास कुछ नहीं था उनके लिए सरकार कुछ नहीं कर रही थी। माटी वाली के पास भी किसी प्रकार की संपत्ति नहीं थी इसलिए बाँध बनने के बाद वह अपना गुज़ारा कैसे करे, उसे इस बात की चिंता सताने लगी।

प्रश्न :- माटी वाली का रोटियों का इस तरह हिसाब लगाना उसकी किस मजबूरी को प्रकट करता है?

उत्तर- माटी वाली की वृद्धावस्था तथा गरीबी पर तरस खाकर घर की मालकिनें बची हुई एक-दो रोटियाँ, ताजा-बासी साग, तथा बची-खुची चाय दे दिया करती थीं, वह उनमें से एकाध रोटी अपने पेट के हवाले कर लेती थी तथा बाकी बची रोटियाँ कपड़े में बाँधकर रख लेती थी, ताकि वह इसे ले जाकर अपने वृद्ध, बीमार एवं अशक्त पति को खिला सके। माटी वाली को जैसे ही दो या उससे अधिक रोटियाँ मिलती थीं वह तुरंत सोचने लगती थी कि इतनी रोटी मैं स्वयं खाऊँगी तथा इतनी बची रोटियाँ अपने पति के लिए ले जाऊँगी। उसके द्वारा रोटियों का यूँ हिसाब लगाना उसकी गरीबी, मजबूरी तथा विवशता को प्रकट करता है।

Important Questions Class 9th ~ Other Chapters

No.Chapter Name
1.दो बैलों की कथा
2.ल्हासा की ओर
3.साँवले सपनों की याद
4.नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया
5.प्रेमचंद के फटे जूते
6.मेरे बचपन के दिन
7.साखियाँ एवं सबद
8.वाख
9.सवैये
10.कैदी और कोकिला
11.मेरे संग की औरतें
12.रीढ़ की हड्डी

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