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Important Questions Class 9th- रीढ़ की हड्डी ~ Reedh ki haddi Extra Questions

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CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter Reedh ki haddi Extra Questions Important Questions/Extra रीढ़ की हड्डी Important Questions :- स्वागत है आपका 99KH.net पर आज हम आपको CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter Reedh ki haddi Extra Questions Important Questions बताने वाले है। ये क्वेश्चन आपकी आने वाले पेपर्स में काफी मदद कर सकते है, इसलिए इन सभी क्वेश्चन को ध्यान से पढ़े।

Reedh ki haddi

Important Questions Class 9th Reedh ki haddi ~ Question & Answer

प्रश्न :- “आपके लाडले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं।” उमा अपने इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करती है?

उत्तर- उमा अपने इस कथन के माध्यम से शंकर की चारित्रहीनता एवं डरपोक स्वभाव की ओर संकेत करती है। शंकर लडकियों के हास्टल के आस-पास घूमता पकडा जाता है और नौकरानी के पैरों गिरकर क्षमा माँगकर किसी तरह छूट कर भागता है।

प्रश्न :- रतन कौन है?

उत्तर- रामस्वरूप का नौकर रतन है। वह बार-बार गलतियां करता रहता है और मालिक की डाँट-फटकार सुनता रहता है। वह भुलक्कड़ प्रवृत्ति का है। वह कभी कुछ तो कभी कुछ भूलता ही रहता है। रामस्वरूप बाबू उसे उल्लू, कमबख़्त और अन्य कई प्रकार की गालियां देकर फटकारते रहते हैं।

प्रश्न :- शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की, समाज को कैसे व्यक्तित्व की ज़रूरत है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर- समाज में उमा जैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता है। वह सुशिक्षित सभ्य और साहसी लड़की है। वह नारी के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने और जागरूकता लाने का काम करती है।

प्रश्न :- कथावस्तु के आधार पर एकांकी का मुख्य पात्र कौन है और क्यों?

उत्तर- कथावस्तु के आधार पर एकांकी का मुख्य पात्र उमा है। लेखक ने उमा के माध्यम से ही नारी के प्रति अपने विचार व्यक्ति किए है। वही केन्द्रबिन्दु है एकांकी की कहानी उसी के आस-पास घूमती है। इसीलिए वह एकांकी की मुख्य पात्र है।

प्रश्न :- ‘कलसों से नहाता था, लोटों की तरह।’ रीढ़ की हड्डी पाठ के इस कथन द्वारा कौन, क्या कहना चाहता है?

उत्तर- रामस्वरूप का नौकर रतन वास्तव में काम कम करता है, बोलता अधिक है। रतन की हँसी का मजाक उड़ाते हुए रामस्वरूप कहते हैं कि उन्होंने अपनी जवानी में बहुत काम किया। जब वह युवा थे तब खूब कसरत करते थे। कसरत के बाद कलसे से पानी शरीर पर यूँ डालते थे, मानो लोटे से नहा रहे हों। इस कथन के द्वारा एक ओर वे जहाँ अपनी युवावस्था का बखान करना चाहते हैं वहीं रतन को अधिक काम करने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।

प्रश्न :- उमा अपने कमरे में मुंह फुलाकर क्यों लेटी हुई थी?

उत्तर- उमा आधुनिक लड़की है। वह पढ़-लिखकर जीवन में कुछ बनना चाहती है। उसके माता-पिता उसका विवाह करना चाहते हैं। वह अभी विवाह नहीं करना चाहती। इसी कारण वह मुँह फुलाकर लेटी हुई थी। इसके साथ-साथ उमा को खूब सज-संवरकर लड़के वालों के समक्ष आना बिल्कुल उचित नहीं लगता था। वह छोटी आयु में विवाह करके अपने भविष्य को भी चौपट नहीं करना चाहती थी।

प्रश्न :- क्या शंकर जैसा लड़का उमा जैसी लड़की के लिए योग्य है?

उत्तर- शंकर जैसा लड़का उमा जैसी लड़की के लिए योग्य तो हो ही नहीं सकता, क्योंकि उमा सुशिक्षित एवं संस्कारवान लड़की है। जबकि शंकर चरित्रहीन और रूढ़िवादी लड़का है।

प्रश्न :- रामस्वरूप बैठक के कमरे में वाद्य यंत्रों को क्यों रखवाते हैं?

उत्तर- रामस्वरूप की बेटी उमा को लड़के बाले देखने आने वाले हैं। वे कमरे की सफाई करवा कर वाद्य यंत्र रखवाते है। वे लड़के वालों को दिखाना चाहते हैं कि उमा को संगीत का ज्ञान है, वह इसके बल पर लड़के वालों को प्रभावित करना चाहते है।

प्रश्न :- गोपाल प्रसाद विवाह को बिज़नेस मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। क्या आप मानते है कि दोनो समान रूप से अपराधी हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर- मेरी दृष्टि में दोनो समान रूप से दोषी हैं। रामस्वरूप उमा की शादी के लिए उसकी उच्च शिक्षा को छिपाते हैं। मेरे विचार से रामस्वरूप को ऐसे परिवार में अपनी बेटी का रिश्ता जोड़ने की नहीं सोचना चाहिए था, जहाँ शिक्षा का सम्मान न हो। रामस्वरूप को उमा को शिक्षित करने पर अपराध नहीं गर्व महसूस करना चाहिए था।दूसरी ओर गोपाल प्रसाद विवाह को बिज़नेस मानते हैं। वह ऐसी पड़ताल करते हैं मानो विवाह नहीं फर्नीचर खरीदने आए हों। वह यह भूल जाते हैं कि विवाह बिज़नेस नहीं पवित्र बंधन होता है। झूठ की बुनियाद पर खड़ा रिश्ता कभी सफल नहीं होता है। अतः मेरी दृष्टि में दोनों अपराधी हैं।

प्रश्न :- उमा को देखने कौन-कौन आया?

उत्तर- उमा को देखने लड़के वाले आए हैं। लड़के के साथ उसके पिता गोपाल प्रसाद आए हैं। वे अपने साथ घर की औरतों को नहीं लाए हैं।

प्रश्न :- रामस्वरूप अपनी पत्नी प्रेमा को गोपालप्रसाद और शंकर के विषय में क्या बताता है?

उत्तर – रामस्वरूप प्रेमा को बताता है कि उनकी लड़की उमा को देखने दो व्यक्ति आ रहे हैं। उनमें से एक लड़के का पिता बाबू गोपालप्रसाद है जो दकियानूसी विचारों का है। वह स्वयं पढ़ा-लिखा और पेशे से वकील है। बड़ी-बड़ी सभा सोसाइटियों में जाता है किंतु अपने लड़के के लिए ऐसी लड़की चाहता है जो अधिक पढ़ी-लिखी न हो। उनका लड़का शंकर बी० एससी० करने के बाद लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है। वह भी लड़कियों की उच्च शिक्षा के पक्ष में नहीं है। रामस्वरूप अपनी पत्नी को समझाता है कि वह उनके सामने उमा की उच्च शिक्षा की बात को छिपाकर ही रखे।

प्रश्न :- शंकर का व्यक्तित्व कैसा है?

उत्तर- शंकर खींसे निपोरने वाला नौजवान है। उसकी आवाज़ पतली और खिसियाहट से भरी हुई है। कमर झुकी हुई है इसलिए उनके मित्र उन्हें ‘बैक बोन’ बुलाते हैं। वह बी० एससी० के बाद लखनऊ मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है। उसका चरित्र ठीक नहीं है वह गर्ल्स कॉलेज हॉस्टल की लड़कियों को छेड़ते हुए पकड़ा गया था।

प्रश्न :- क्या गोपाल प्रसाद लड़के-लड़कियों को समान दृष्टि से देखता है? स्पष्ट करें।

उत्तर- गोपाल प्रसाद की सोच समाज के लिए हितकर नहीं है। वह लड़के तथा लड़कियों को समान दृष्टि से नहीं तरह-तरह के तर्क देकर लड़के-लड़कियों में अंतर बताकर दूसरों को उकसाता है। उसका मानना है कि लड़कों को पढ़ना-लिखना चाहिए, काबिल बनना चाहिए जबकि लड़कियों को पढ़ना-लिखना आवश्यक नहीं है क्योंकि उन्हें घर ही तो चलाना है। अपनी बात के प्रमाण में वह कहता है कि मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं, शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।

प्रश्न :- उमा ने गोपाल प्रसाद से जो व्यवहार किया, वह कहाँ तक उचित है?

उत्तर- गोपाल प्रसाद पुरातनपंथी सोच के प्रतीक हैं। ऐसे लोग स्त्री शिक्षा के विरोधी और नारी को उपभोग की वस्तु मानते हैं। उनके विचार से शिक्षित नारी अपने अधिकारों के लिए सजग हो जाएगी, पुरूष के गलत कार्यों का विरोध करेगी, जो उचित नहीं है। वे शिक्षा को सिर्फ लड़कों के लिए ज़रूरी मानते हैं। उमा ने उनके नारी शिक्षा विरोधी विचारों को जानकर ही कहा कि- मैंने बी ए किया है, कोई पाप नहीं किया है।

उमा द्वारा गोपाल प्रसाद के साथ किया गया व्यवहार सर्वथा उचित है। लड़का-लड़की समान हैं। लड़की के विरूद्ध सोच रखने वाले को इसी तरह की लताड़ की ज़रूरता रहती है।

प्रश्न :- गोपाल बाबू अपने लड़के शंकर की कमियों को किस प्रकार ढकते हैं?

उत्तर- उमा ने सबके सामने शंकर की असलियत खोल दी इस पर गोपाल प्रसाद बाबू को अपनी बेइज्जती लगती है। वह गुस्से में खड़े हो जाते हैं। वह रामस्वरूप बाबू से कहते हैं कि उन्होंने उनसे झूठ बोला है। उनकी लड़की ने हॉस्टल में रहकर बी०ए० किया है। उन्हें कम पढ़ी-लिखी लड़की चाहिए थी। ऐसे झूठे लोगों से वह संबंध नहीं जोड़ना चाहते और घर से बाहर निकल जाते हैं। इस प्रकार एक घमंडी लड़के का पिता लड़की में कमी ढूँढ़ता हुआ अपने लड़के की कमियों को छिपाता है।

प्रश्न :- उमा गाना गाने के बाद गोपालदास द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर क्यों नहीं देती है?

त्तर- उमा जब गाना गाती है तो गाते-गाते उसका झुका हुआ मस्तक उठ जाता है और वह शंकर को देख लेती है। वह शंकर को पहचान लेती है। शंकर कुछ ही दिनों पहले लड़कियों के हॉस्टल के इर्द-गिर्द तांक-झाँक करता पकड़ा गया था और उसे वहाँ  से भगाया गया था। उसे देखने के बाद उमा निश्चय कर लेती है कि वह उसके साथ किसी भी स्थिति में विवाह नहीं करेगी। इसी कारण बाबू गोपालदास द्वारा पूछे गए सवालों का वह उत्तर नहीं देती।

प्रश्न :- रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद बात-बात पर “एक हमारा ज़माना था …” कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस प्रकार की तुलना करना कहाँ तक तर्कसंगत है?

यह मनुष्य का स्वाभाविक गुण है कि वह बीते हुए समय को ज्यादा अच्छा बताता है। गोपाल प्रसाद और रामस्वरूप भी ‘हमारा जमाना था…’ कहकर अपने समय को अधिक अच्छा बताने की कोशिश करते हैं। वास्तव में उनकी इस तुलना को तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता है। हो सकती है कि कुछ बातें उस समय में अच्छी रही हों पर सारी बातें अच्छी रही हों यह भी संभव नहीं। जो बातें अच्छी थीं वे भी तत्कालीन समाज की परिस्थितियों में खरी उतरती होंगी पर बदलते समय के अनुसार वे सही ही हो यह आवश्यक नहीं। हर समाज की आवश्यकताएँ समयानुसार बदलती रहती हैं। जैसे पहले स्त्रियों को पढ़ाना भले आवश्यक न समझा जाता रहा हो पर आज स्त्रियों की शिक्षा समाज की आवश्यकता बन चुकी है। इसी तरह आज की बातें आज के परिप्रेक्ष्य में अच्छी है और तत्कालीन समाज के लिए वे बातें अच्छी रहीं होंगी। इस प्रकार उनके द्वारा की गई तुलना तर्कसंगत नहीं है।

प्रश्न :- ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।

उत्तर- रीढ़ की हड्डी एकांकी में लेखक ने अत्यंत सरल एव बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है। भाषा प्रसंगानुकूल, भावानुकूल एवं पात्रों के अनुरूप है। लेखक ने अंग्रेज़ी के अनेक शब्दों को बड़े सहज भाव से प्रयोग किया है। एकांकी में आए अंग्रेजी के शब्द हैं-बैकबोन, हॉस्टल, मैट्रिक, वीक एंड, पालिटिक्स, कॉलेज। इसके साथ-साथ उर्दू-फारसी के शब्दों की भरमार है। जैसे-मर्ज, दकियानूसी, तकदीर, काबिल, जायका, निहायत, बेइज्जती, दगा, बेढ़ब आदि। लेखक ने कहीं-कहीं मुहावरों का भी प्रयोग किया है। जैसे भीगी बिल्ली बनना, चौपट कर देना आदि। ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी की शैली संवादात्मक है। लेखक ने छोटे-छोटे संवादों का प्रयोग करते हुए कथावस्तु को गति प्रदान की है। भाषा-शैली में नाटकीयता और चित्रात्मक का गुण सर्वत्र विद्यमान है।

Important Questions Class 9th ~ Other Chapters

No.Chapter Name
1.दो बैलों की कथा
2.ल्हासा की ओर
3.साँवले सपनों की याद
4.नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया
5.प्रेमचंद के फटे जूते
6.मेरे बचपन के दिन
7.साखियाँ एवं सबद
8.वाख
9.सवैये
10.कैदी और कोकिला
11. मेरे संग की औरतें

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