Important Questions Class 9th- वाख ~ Vaakh Extra Questions

CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter Vaakh Important Questions/Extra Questions | CBSE Class 9 वाख Important Questions :- स्वागत है आपका 99KH.net पर आज हम आपको CBSE Class 9 Kshitiz Hindi Chapter Vaakh Important Questions बताने वाले है। ये क्वेश्चन आपकी आने वाले पेपर्स में काफी मदद कर सकते है, इसलिए इन सभी क्वेश्चन को ध्यान से पढ़े।

Vaakh

Important Questions Class 9th Vaakh ~ Short Questions

प्रश्न :- कवयित्री ललद्यद किस रस्सी से कौन-सी नाव खींचना चाहती है?
उत्तर- वह जीवन की कच्चे धागे रूपी रस्सी से प्रभु भक्ति की नाव खींचना चाहती है?

प्रश्न :- ललद्यद के अनुसार परमात्मा-प्राप्ति के मार्ग में कौन-कौन सी बाधाएँ सामने आती हैं?
उत्तर- मनुष्य की नश्वरता, सांसारिक भोग, अहंकार, हठयोग, सांप्रदायिक भेदभाव एवं अज्ञानता।

प्रश्न :- कवयित्री ललद्यद ने ईश्वर का निवास कहाँ बताया है?

उत्तर- कवयित्री ने ईश्वर को सर्वव्यापी बताते हुए उसे हर जगह पर व्याप्त रहने वाला कहा है। वास्तव में ईश्वर का वास हर प्राणी के अंदर है परंतु मत-मतांतरों के चक्कर में पड़कर अज्ञानता के कारण मनुष्य अपने अंदर बसे प्रभु को नहीं पहचान पाता है। इस प्रकार कवयित्री का प्रभु सर्वव्यापी है।

प्रश्न :- कवयित्री ललद्यद ने परमात्मा प्राप्ति के लिए क्या उपाय बताया है?
उत्तर- परमात्मा प्राप्ति के लिए दिल में हूक उठना आवष्यक है, त्याग एवं भोग में सामंजस्य स्थापित करके अपने आत्मज्ञान द्वारा।

प्रश्न :- वाख कविता के आधार में भाव स्पष्ट कीजिए- जेब टटोली कौड़ी न पाई।

उत्तर- भाव – कवयित्री ने अपना सारा जीवन सांसारिक वासनाओं में फंसकर व्यर्थ गँवा दिया। जीवन के अंतिम समय में जब उन्होंने पीछे देखा तो ईश्वर को देने के लिए उनके पास कोई सद्कर्म ही नहीं थे।

प्रश्न :- कवयित्री ने कच्चे सकोरे किसे कहा है?
उत्तर- जीवन की नश्वरता को।

प्रश्न :- ‘गई न सीधी राह’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर –‘गई न सीधी राह’ से कवयित्री का तात्पर्य है कि परमात्मा ने उसे जब संसार में भेजा था तो वह सीधी राह पर चल रही थी परंतु संसार के मायात्मक बंधनों ने उसे अपने बस में कर लिया और वह चाहकर भी परमात्मा को प्राप्त करने के लिए भक्ति मार्ग पर नहीं बढ़ सकी। दुनियादारी में उलझ कर सद्कर्म नहीं किया।

प्रश्न :- कवयित्री ललद्यद किसे साहब मानती है? वह साहब को पहचानने का क्या उपाय बताती है?

उत्तर- कवयित्री परमात्मा को साहब मानती है, जो भवसागर से पार करने में समर्थ हैं। वह साहब को पहचानने का यह उपाय बताती है कि मनुष्य को आत्मज्ञानी होना चाहिए। वह अपने विषय में जानकर ही साहब को पहचान सकता है।

प्रश्न :- ‘ज्ञानी है तो स्वयं को जान’ आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- कवयित्री के अनुसार ज्ञानी मनुष्य वही है जिसे आत्मज्ञान है। जो स्वयं को जानता है।

प्रश्न :- कवयित्री क्या प्रेरणा देना चाहती है?

उत्तर- कवयित्री मनुष्य को यह प्रेरणा देना चाहती है कि बाहरी आडंबरों से कुछ भी संभव नहीं है। मानव को अपने जीवन में सहजता बनाए रखनी चाहिए। संयम का भाव श्रेष्ठ होता है। और इसी से वह परमात्मा को प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न :- वाख में रस्सी किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है?

उत्तर- वाख में ‘रस्सी’ शब्द मनुष्य की साँसों के लिए प्रयुक्त हुआ है। इसके सहारे वह शरीर-रूपी नाव को इस संसार रुपी सागर में खींच रहा है। यह रस्सी अत्यंत कमज़ोर है। यह कब टूट जाए इसका कुछ निश्चित पता नहीं है। अर्थात् मनुष्य की साँसे कब रुक जाए , इसका कुछ पता नहीं है।

प्रश्न :- मनुष्य मन ही मन भयभीत क्यों हो जाता है?

उत्तर-परमात्मा जब मनुष्य को धरती पर भेजता है, उसका मन साफ होता है उसे दुनियादारी से कोई मतलब नहीं होता है परंतु धीरे-धीरे वह संसार के मोह-माया के बंधनों में उलझ जाता है। वह सद्कर्मों से दूर हो जाने पर मन ही मन भयभीत होता है कि अब उसका समय पूरा होने वाला है, उसे परमात्मा के पास वापिस जाना है, परमात्मा जब उसके कर्मों का लेखा-जोखा देखेगा, वह क्या बताएगा। भव सागर से पार जाने के लिए मनुष्य के सद्कर्म ही उसके काम आते हैं। यही सोच मनुष्य को मन ही मन भयभीत करती रहती है।

प्रश्न :- कवयित्री किस ‘घर’ में जाना चाहती है? उसके हृदय में बार-बार हूक क्यों पैदा हो रही है?

उत्तर- कवयित्री परमात्मा के पास जाना चाहती है। उसे लगता है कि यह संसार उसका असली घर नहीं है। उसका असली घर तो वह है जहाँ परमात्मा निवास करते हैं। इसीलिए उसके हृदय में बार-बार यहीं हूक पैदा होती है कि वह परमात्मा की शरण प्राप्त करे। इस जीवन को त्याग दे, पर ऐसा संभव नहीं हो रहा है। वह इसके लिए निरंतर प्रयास कर रही है। अपनी असफलता पर उसका हृदय विचलित हो रहा है।

Important Questions Class 9th ~ Other Chapters

No.Chapter Name
1.दो बैलों की कथा
2.ल्हासा की ओर
3.साँवले सपनों की याद
4.नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया
5.प्रेमचंद के फटे जूते
6.मेरे बचपन के दिन
7. साखियाँ एवं सबद

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