NCERT Solutions for Class 9th – मेरे संग की औरतें ~ Mere Sang ki Auratein NCERT Solutions

CBSE Class 9 Kritika Hindi Chapter 2 Mere Sang ki Auratein NCERT Solutions PDF Download | CBSE Class 9 मेरे संग की औरतें पाठ के प्रश्न उत्तर/NCERT Solutions :- स्वागत है आपका 99KH.net पर आज हम आपको CBSE Class 9 Kritika Hindi Chapter Mere Sang ki Auratein NCERT Solutions बताने वाले है। ये क्वेश्चन आपकी आने वाले पेपर्स में काफी मदद कर सकते है, इसलिए इन सभी क्वेश्चन को ध्यान से पढ़े। अगर आपको कोई समस्या आती है तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर पूछे।

 Mere Sang Ki Auraten NCERT Solutions

Mere Sang ki Auratein NCERT Solutions Class 9th ~ Question & Answer

1. लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं ?

उत्तर:- लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे इसलिए प्रभावित थीं क्योंकि उनकी नानी, पारंपरिक, अनपढ़, परदानशीं औरत थीं, जिनके पति शादी के तुरंत बाद उन्हें छोड़कर बैरिस्ट्री पढ़ने विलायत चले गए थे। कैंब्रिज विश्वविद्यालय से डिग्री लेकर जब वे लौटे और विलायती रीति-रिवाज के संग ज़िन्दगी बसर करने लगे तो नानी ने अपने रहन-सहन पर उसका कोई असर नहीं पड़़ने दिया, न उन्होंने अपनी किसी इच्छा-आकांक्षा या पसंद-नापंसद का इज़हार पति पर कभी किया पर जब कम-उम्र में नानी ने खुद को मौत के करीब पाया तो, पंद्रह वर्षीय इकलौती बेटी ‘लेखिका की माँ’ की शादी की फ़िक्र में वे मुँहज़ोर एवं बेपरदा होकर अपने पति के दोस्त से मिलीं। इतना ही नहीं जो बात उन्होंने अपने पति के दोस्त से कही, वह साबित करती है कि वे अपनी निजी ज़िन्दगी में कितनी स्वतंत्र और आज़ाद ख्यालों वाली महिला थी जो अपने देश से बेइंतहा प्रेम करती थीं और देश के सिपाहियों के प्रति गज़ब का आदर भाव रखती थीं और शायद अपनी ज़िंदगी भी अपनी ही शर्तों पर जीती थीं।


2. लेखिका ने नानी की आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही ?

उत्तर:- वह प्रत्यक्ष रुप में भले ही आज़ादी की लड़ाई में भाग नहीं ले पाई हों परन्तु अप्रत्यक्ष रुप में सदैव इस लड़ाई में सम्मिलित रहीं और इसका मुख्य उदारहण यही था कि उन्होनें अपनी पुत्री की शादी की ज़िम्मेदारी अपने पति के स्वतंत्रता सेनानी मित्र को दी थी। वह अपना दामाद एक आज़ादी का सिपाही चाहती थीं न कि अंग्रेज़ों की चाटुकारी करने वाले को।


3.1 लेखिका की माँ परम्परा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में –
(क): लेखिका की माँ की विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर:- 

  • 1. लेखिका की माँ दुबली-पतली सुन्दर स्त्री थीं। इस कारण लेखिका ने उन्हें पारिजात बताया है।
  • 2. वे हमेशा खद्दर की साडी पहनती थी। वे आजीवन गाँधीजी के सिद्धांतों का पालन करती रही।
  • 3. लेखिका की माँ कभी किसी की गोपनीय बातों को प्रकट नहीं करती थीं,वे सत्यवादी, ईमानदार,नाजुक मिजाज और आज़ादी के प्रति जूनून रखने वाली महिला थी।
  • 4. लेखिका की माँ  ने आम भारतीय महिलाओं की तरह बच्चे संभालना, घर गृहस्थी और खाना पकाने की जिम्मेदारी को नहीं उठाया। उन्हें पुस्तकें पढ़ने का शौक था।
  • 5. उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावी था कि ठोस कामों में न केवल उनकी राय ली जाती थी बल्कि उसका शत प्रतिशत पालन भी किया जाता था।

3.2 लेखिका की माँ परम्परा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी इस कथन के आलोक में –
लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द चित्र अंकित कीजिए ।

उत्तर:- लेखिका की दादी के घर में विचित्र विरोधों का संगम था। परदादी लीक से परे हटकर थीं। वे चाहती थीं कि उनकी पतोहू को होने वाली पहली संतान कन्या हो। उसने यह मन्नत मानकर जगजाहिर भी कर दी। इससे घर के अन्य सभी लोग हैरान थे। परंतु लेखिका की दादी ने इस इच्छा को स्वीकार करके होने वाली पोती को खिलाने-दुलारने की कल्पनाएँ भी कर डालीं। लेखिका की माँ तो बिलकुल ही विचित्र थीं। वे घर का कोई काम नहीं करती थीं। वे आज़ादी के आंदोलन में सक्रिय रहती थीं। उन्हें पुस्तकें पढ़ने, संगीत सुनने और साहित्य चर्चा करने से ही फुर्सत नहीं थी। उनके पति भी क्रांतिकारी थे। वे आर्थिक दृष्टि से अधिक समृद्ध नहीं थे। विचित्र बात यह थी कि लेखिका के दादा अंग्रेजों के बड़े प्रशंसक थे। घर में चलती उन्हीं की थी। किंतु घर की नारियाँ अपने-अपने तरीके से जीने के लिए स्वतंत्र थीं। कोई किसी के विकास में बाधा नहीं बनता था।


4. आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी ?

उत्तर:- परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत इसलिए माँगी क्योंकि वे एक स्वतंत्र ख्यालों की बहादुर महिला थी। वे लड़कियों को लड़कों के समान ही मानती थी जो कि उनकी मन्नत से साबित हो गया। उस समय उन्होंने समाज में लड़कियों के प्रति सम्मान की भावना जगाने हेतु व समान हक दिलवाने हेतु ही स्वयं के घर से शुरुआत की।


5. डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है – पाठ के आधार पर तर्क-सहित उत्तर दीजिए ।

उत्तर:- सहजता से किसी को समझाकर सही राह पर लाया जा सकता है। लेखिका की माँ ने एक चोर को जो चोरी के उद्देश्य से उन्हीं के कमरे में घुसा हुआ था, न तो डराया या धमकाया बल्कि अपनी सहज बातों से उसे चोरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया।


6. ‘शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है’ – इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख करें ।

उत्तर:- 

लेखिका बच्चों की शिक्षा के प्रति बहुत जागरूक थीं। उनके अनुसार हर बच्चे को शिक्षा पाने का अधिकार था। इसी उद्देश्य से उन्होंने कर्नाटक के छोटे से कस्बे, बागलकोट में बच्चों के लिए जहाँ स्कूल का अभाव था, कैथोलिक बिशप से स्कूल खोलने का आग्रह किया। चूंकि वहाँ क्रिश्चयन बच्चों की संख्या अधिक नहीं थी इसलिए बिशप ने उनकी दरखास्त को नामंजूर कर दिया। लेखिका इससे हताश नहीं हुईं अपितु अपने प्रयासों से उन्होंने तीन भाषाएँ पढ़ाने वाला (अंग्रेज़ी, हिंदी, कन्नड़) स्कूल स्वयं आरंभ कर दिया और उसे वहाँ मान्यता भी दिलवाई।


7. पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है ?

उत्तर:- इस पाठ के आधार पर स्पष्ट है कि ऊँची भावना वाले दृढ़ संकल्पी लोगों को श्रद्धा से देखा जाता है। जो लोग सद्भावना से व्यवहार करते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर गलत रूढ़ियों को तोड़ डालने की हिम्मत रखते हैं, समाज में उनका खूब आदर-सम्मान होता है।

लेखिका की नानी इसलिए श्रद्धेया बनी क्योंकि उसने परिवार और समाज से विरोध लेकर भी अपनी पुत्री को किसी क्रांतिकारी से ब्याहने की बात कही। इस कारण वह सबकी पूज्या बन गईं। लेखिका की परदादी इसलिए श्रद्धेया बनी क्योंकि उसने दो धोतियों से अधिक संचय न करने का संकल्प किया था। उसने परंपरा के विरुद्ध लड़के की बजाय लड़की होने की मन्नत मानी। लेखिका की माता इसलिए श्रद्धेया बनी क्योंकि उसने देश की आज़ादी के लिए कार्य किया। कभी किसी से झूठ नहीं बोला। कभी किसी की गोपनीय बात को दूसरे को नहीं बताया। ये सभी व्यक्तित्व सच्चे थे, लीक से परे थे तथा दृढ़ निश्चयी थे। इस कारण इनका सम्मान हुआ। इन पर श्रद्धा प्रकट की गई।


8. ‘सच अकेलेपन का मजा ही कुछ और है’ इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए ।

उत्तर:- लेखिका और उनकी बहन जो सोचती थी उसे पूरा करके ही दम लेती थी। उनकी बहन बड़ी जिद्दी थी परन्तु उनके इस जिद्दीपन ने उनका दृढ निश्चयी स्वभाव झलकता है। अत्यधिक बारिश होने के बावजूद, सब के मना करने के बावजूद लेखिका की बहन विद्यालय जाती है,गाड़ी होते हए भी पैदल जाना पसन्द करती थी तो दूसरी ओर लेखिका जब डालमिया नगर में रहतीं थीं तब उन्होंने स्त्री-पुरुष के नाटकों द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए धन एकत्रित किया । कर्नाटक में स्कूल खोला । ये सारी बातें लेखिका के स्वतंत्र व्यक्तित्व, हिम्मत, धैर्य और लीक से हटकर अपनी अलग राह चलने वाले तथा अलग पहचान बनाने वाले व्यक्तित्व की ओर संकेत करते हैं ।

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