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स्कूल कैसे खोले- जाने इसके नियम, प्रक्रिया और रजिस्ट्रेशन की सारी जानकारी | How to start a School in India in Hindi

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स्कूल कैसे खोले, नियम, प्रक्रिया और रजिस्ट्रेशन | How to start a School in India in Hindi | Rules, Process & Registration :- स्कूल खोलने बिज़नेस एक ऐसा बिज़नेस है जिसमे कभी मंदी नहीं आती। 12 महीने बच्चे पढ़ते है और फीस भरते है, पुराने बच्चे जाते है तो नए बच्चे आते है लेकिन स्कूल के बिज़नेस में मंदी नहीं आती।

स्कूल शुरू करना ना केवल एक बिजनेस है, बल्कि यह एक प्रकार की समाज सेवा भी है, जिसमे आप शिक्षा के माध्यम में एक सुशिक्षित और सभ्य समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं क्यूंकि यह शिक्षा ही है जिसकी बदौलत आज हमने अपने जीवन में इतना विकास किया है। शिक्षा की मदद से आज हम चाँद पर भी पहुंच गए है।

एक अच्छा स्कूल खोलकर आप अच्छे खासे पैसे कमा सकते है। आप देखते ही होंगे कि आजकल सारे सरकारी स्कूल किस व्यवस्था से गुजर रहे हैं ,ऐसा नही की सरकार पैसे नही देती ,पैसे सरकार बहुत खर्च करती है लेकिन वो पैसे स्कूल तक पहुचते-पहुचते खत्म हो जाते हैं और भी बहुत कारण है जिनके चलते अब सरकारी स्कूल अच्छे से नहीं चल पा रहे है। इसी कारण अब सभी अभिवावक अपने बच्चे के लिए अच्छा प्राइवेट स्कूल चाहते है।

स्कूल खोलने उपाय आपके लिए बहुत अच्छा भी साबित हो सकता है हालांकि स्कूल खोलने में खर्चा तो अधिक है लेकिन जो फायदा आपको स्कूल खोलने के बाद होगा उसके मुकाबले खर्चा बहुत कम है। बिजनेस चाहे जैसा हो इन्वेस्ट जितना अधिक होगा रिटर्न्स भी उतना ही अधिक होगा। यहां आपको आज हम सरल भाषा मे बताएंगे कि किस तरह से आप एक अपना स्कूल खोल सकते हैं।

 School Kaise Khole in Hindi 

स्कूल बनाने के लिए बजट तैयार करें (Prepare a budget to build a school)

ब्लू प्रिंट तैयार करने के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम अपने फिननेस की व्यवस्था करना है। भारत में कहीं भी प्ले स्कूल खोलने के लिए आपके खाते से कम से कम 6-8 लाख रुपये होंगे। एक प्राथमिक विद्यालय के लिए लगभग 8-10 लाख रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। 10+2 स्कूल की स्थापना के लिए 2 करोड़ रुपये तक की लागत आ सकती है। स्कूल के निर्माण, फर्नीचर बनाने, कर्मचारियों की भर्ती, विज्ञापन शुल्क आदि में अपने बजट वितरण की योजना बनाएं।

स्कूल के लिए जगह का निर्धारण (Land for the School)

सबसे पहले आपको अपने स्कूल के लिये आवश्यक जगह की आवश्यकता होगी। आप यह जगह या तो किराए पर ले सकते है, जगह खरीद सकते है और या फिर आपके पास अपनी कोई जगह है तो आप उसका इस्तेमाल कर सकते है।

आपको बतादे की एक प्ले स्कूल के लिए आपको ग्राउंड फ्लोर पर 2000 वर्ग फुट क्षेत्र की आवश्यकता होगी। प्राथमिक विद्यालय खोलने के लिए चयनित भूमि लगभग 6000 वर्ग फुट से 7000 वर्ग फुट होनी चाहिए, जबकि एक सीनियर विद्यालय को 2 एकड़ तक के क्षेत्र की आवश्यकता होगी। शिक्षा विभाग से एनओसी प्राप्त करने के बाद, आप भूमि बकाया एजेंसियों से जमीन खरीद सकते हैं। जमीन खरीदने की बजाय आप इसे लीज पर भी ले सकते हैं लेकिन रेंटल एग्रीमेंट के साथ कम से कम 30 साल के लिए।

स्कूल जल्दी शुरू करें (Start School Early)

एक बार जब आप भूमि को फाइनल कर ले, तो बिना देर किए इसके निर्माण की योजना बनाना शुरू कर दें। अपने विद्यालय के बिल्डिंग और उसके ऑफिस को डिजाइन करने के लिए एक ठेकेदार या एक आर्किटेक्ट की नियुक्ति करें। स्कूल खोलते समय, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आपके पास छात्रों की सुरक्षा के उपाय, बड़े खेल के मैदान, रंगीन कक्षाएं, उचित वेंटिलेशन और स्वच्छता आदि हों।

सेकेंडरी स्कूल शुरू करने के लिए निम्न बातों की आवश्यकता होती हैं ( How to start a Secondary School )

यदि आपके पास पहले से प्राइमरी स्कूल हैं तो आप स्कूल में क्लास के एक्सटेंशन मतलब आगे बढ़ने के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। ये ना केवल आसानी मिल जाएगा बल्कि इससे स्कूल एक-एक वर्ष करके आगे बढ़ता रहेगा।

जैसे ही डॉक्यूमेंटेशन पर काम करना शुरू करे आप आवश्यक लीगल डॉक्यूमेंट भी साथ में ही तैयार कर सकते हैं जैसे एनओसी और अन्य अप्रूवल के लिए आवश्यक डाक्यूमेंट्स. इसके लिए अपने लोकल म्युनिसिपल प्राधिकरण,शिक्षा विभाग और स्वास्थय विभाग से संपर्क करना होता हैं।

भारत में कैसे सीबीएसई स्कूल शुरू करें?? (How to start a CBSE School in India)

सीबीएसई स्कूल खोलने के लिए आपको बोर्ड के मानकों पर खरा उतरना जरुरी होता हैं। शिक्षा एक राज्य का मुद्दा हैं इसलिए स्कूल के पास राज्य सरकार से मिली परमिशन होना अनिवार्य हैं, चाहे सीबीएसई हो आईसीएसई हो या आईबी बोर्ड हो सबके पास स्टेट बोर्ड की एफ़ीलिएशन होना अनिवार्य हैं।

सीबीएसई स्कूल शुरू करने के लिए बहुत सी फ्रेंचाइजी या ब्रांड हैं जिनके अंडर में अपने शहर में अपने बजट से स्कूल से शुरू की जा सकती हैं,जैसे ब्राइटन इंटरनेशनल स्कूल, डीपीएस, भारतीय विद्या भवन, एवेरोन, मनिपाल, शैमरॉक, मेयो कॉलेज, कंगारू किड्स इत्यादि। इन्हें सिक्योरिटी डिपोजिट,लाइसेंस फीस (हर वर्ष चार्ज की जाती हैं) और प्रति छात्र रिवेन्यु शेयर भी देना होता हैं,ये फिक्स नहीं हैं,ये सब अलग-अलग संस्थाओं के लिए अलग-अलग होता हैं.

एक बार बिल्डिंग और स्टाफ तैयार होने पर लोकल एजुकेशन ऑफिस में (डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिस) फीस जमा करवाई जा सकती हैं. एक बार निरिक्षण करने बाद वे सोसाइटी या ट्रस्ट के लिए आवश्यक सर्टिफिकेट दे देंगे. राज्य बोर्ड के अलावा कोई भी बोर्ड निरीक्षण से पहले अपने ब्रांडनाम के उपयोग की परमिशन नहीं देता.

सीबीएसई या आईसीएसई बोर्ड के लिए स्कूल के इंस्पेक्शन के एक वर्ष बाद ही अप्लाई किया जा सकता हैं, आईसीएसई में ये अवधि 3 साल की हैं। इसके लिए बहुत से गाइडलाइन नेट पर भी उपलब्ध हैं। इसे 8वीं कक्षा से भी शुरू किया जा सकता हैं। एफिलिएशन हासिल करने के लिए सबसे मुश्किल काम हैं एनओसी हासिल करना वैसे एफ़ीलीएशन प्राप्त करने के लिए होने वाली प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी हैं इसके लिए किसी बीच के व्यक्ति की आवश्यकता नहीं होती।

सबसे पहले अपने आपको रजिस्टर करेhttp://cbseaff.nic.in/cbse_aff/form/Instruction.aspx
सभी लॉ को समझने के लिए लिंकhttp://164.100.129.152/cbse_aff/Attachment/OnlineServices/AffiliationByeLaws_14112012.pdf
सीबीएसई मैन्युअल http://164.100.129.152/cbse_aff/welcome.aspx
लैंड सर्टिफिकेट फॉर्मेट http://cbse.nic.in/Land%20Proforma.html

वैसे स्कूल खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की लिस्ट बहुत लम्बी हैं लेकिन कुछ मुख्य डाक्यूमेंट्स जो चाहिए वो हैं- बैंक ड्राफ्ट,ट्रस्ट/सोसाइटी मैनेजिंग कमिटी द्वारा ज़ारी किया गया रजिस्ट्रेशन लेटर, नॉन-प्रोपरीएट्री करैक्टर ऑफ़ सोसाइटी, एनओसी, हेल्थ एंड सेनीटशन सर्टिफिकेट, सेफ ड्रिंकिंग वाटर (अपेंडिक्स vii ऑफ़ एफ़ीलीएशन बाय लॉ) बिलडिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट, बैलेंस शीट/ फाइनेंसियल स्टेटस सर्टीफाईड बाय सीए फॉर लास्ट 3 इयर्स, सैलरी पेड थ्रू इसीएस/चेक, इन्फ्रास्ट्रक्चर डिटेल फोटोग्राफ(लैब,टॉप व्यू रूफ ऑफ़ स्कूल जिसमें प्लेग्राउंड भी हो और 4रों तरफ की बाउंड्री वाल की फोटो, स्टाफ इपीएफ डिडक्शन सर्टिफिकेट चाहिए होता हैं.

स्टेट बोर्ड का स्कूल शुरू करना (How to start a State Board School)

हर राज्य के अपने रूल्स और बोर्ड होते हैं जो कि 10 और 12 के एग्जाम करवाते हैं. कुछ राज्य सरकारे 8वी के लिए भी बोर्ड करवाती हैं.

स्टेट बोर्ड का स्कूल शुरू करने का ये फ़ायदा हैं कि यह राज्य से जुड़ा होता हैं इसलिए सभी आधिकारिक काम आसानी से हो जाते है. हालांकि इसके लिए तरीका और नियम काफी हद तक वो ही होते हैं जो सीबीएसई बोर्ड के लिए है लेकिन कुछ अलग बातों का ध्यान रखना होता हैं जो कि अपने राज्य की एजुकेशन की साईट पर जाकर खोजा जा सकता हैं,और इसमें जिलाधिकारी की मदद ली जा सकती हैं.

टीचर किस आधार पर ले? (what basis should the teacher take it)

स्कूल के लिए अध्यापकों के लेते समय ये बात ध्यान रखे कि कम से कम आपके स्कूल में 2 अध्यापक तो B.ED किये हुए होने ही चाहिए। यह स्कूल खोलने का एक जरुरी मानक है जिसका पालन आपको अनिवार्य है।

स्कूल के लिए मार्केटिंग और प्रमोशन (Marketing and Promotion for School)

स्कूल खुलने के बाद सबसे जरूरी अगर कुछ होता है वो है स्कूल का प्रमोशन। आसपास के लोगो को स्कूल के बारे में बताने के लिए आप ऑनलाइन और ऑफलाइन स्कूल का प्रमोशन कर सकते हैं।

  • ऑनलाइन :- आप अपनी स्कूल की वेबसाइट बना बना सकते है और इसी के साथ आप सोशल सोशल मीडिया एप्लीकेशन पर स्कूल के नाम का पेज बना सकते हैं और पेज को प्रमोट भी कर सकते है। पेज बनाने के बाद आप पेज पर स्कूल के पोस्टर ,वहाँ की सुविधाएं ,वहां के रूम्स की फोटो डालकर लोगों को आकर्षित कर सकते हैं। इसके लिए आप किसी सोशल मीडिया एक्सपर्ट की मदद भी ले सकते हैं।
  • ऑफलाइन :- ऑफलाइन प्रचार के लिए आप प्रचार के कई तरीके काम मे ला सकते हैं जैसे आप अखबार में इश्तेहार दे सकते है, पेंफलेट्स छपवा के बांट सकते है, होर्डींग एवं बेनर भी लगवा सकते है, ध्यान रहे की आपका विज्ञापन ऐसा होना चाहिए कि जो लोगो को आकर्षित करे। आप एक और तरीका अपना सकते है की आसपास के घरो में जाकर आप अपने स्कूल का प्रचार करे और उस घर में मौजूद बच्चो का रजिस्ट्रेशन अपने स्कूल में करने की कोशिश करे। जितना ज्यादा मार्केटीग होगा उतना ही आपको वर्तमान एवं भविष्य में फ़ायदा होगा।

स्कूल से होने वाला मुनाफा (Income From School)

स्कूल से आप कोशिश करें तो आराम से 2 से 3 लाख तक हर साल कमा सकते है। मान लीजिये आपके स्कूल में कुल 100 छात्र पढ़ते है। और हर छात्र की फीस 6,000₹ है तो 100 छात्र है से आप सालाना 6,00,000 ₹ कमा लेंगे। अब इन 6 लाख में से आपको स्कूल के टीचर्स, ट्रांसपोर्ट, बिजली का बिल और अन्य ख़र्चा भी देना होगा, अब मान लीजिये की 3 लाख आपका इन खर्चो में ख़र्च हो गया और आपके पास बचे 3 लाख आपके होंगे यानि की आपका 3 लाख का मुनाफा।

स्कूल खोलना फायदे का सौदा है ? (Is school business profitable in india)

स्कूल खोलने में कमाई तो बहुत है लेकिन कमाई के साथ आपको सबसे पहले बहुत ज्यादा इन्वेस्टमेंट करना पड़ेगा, जैसे की आपको जमीन खरीदनी पड़ेगी, स्कूल बनाना पड़ेगा, फर्नीचर लेना पड़ेगा और टीचर्स जैसे बहुत सी जगह स्कूल स्कूल खोलने के लिए पहले आपको इन्वेस्टमेंट करना पड़ेगा। आपस में कम्पटीशन बढ़ने के कारण छोटे स्तर पर स्कूल खोलने की रिस्क भी लगातार बढ़ रही हैं। इसके लिए यदि कोई अच्छी फ्रेंचाइजी के साथ काम मिल गया तो राह बहुत आसान हो जाती हैं, वरना कई वर्षों तक स्कूल से फायदे नहीं मिलते हैं।

उम्मीद है आपको हमारे इस आर्टिकल में School Kaise Khole in Hindi के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर फिर भी आप इस बारे में कुछ पूछना चाहते हैं, तो बेझिझक हमें कमेंट सेक्शन में मैसेज करें और हम आपका जवाब जरूर देंगे।

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